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कार्यक्रम एवं योजनाएं | समाज कल्याण विभाग, उत्तर प्रदेश, भारत की आधिकारिक वेबसाइट है ।

कार्यक्रम एवं योजनाएं

वृद्धावस्था पेंशन

वृद्धावस्था/किसान पेंशन योजनान्तर्गत 60 वर्ष या उससे अधिक आयु वर्ग के ऐसे समस्त वृद्धजन जिनकी आय सीमा ग्रामीण क्षेत्र में रू0 46080/- एवं शहरी क्षेत्र में रू0 56460/- वार्षिक तक होती है, पेंशन योजनान्तर्गत पात्र होंगें। इस योजनान्तर्गत 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के वृद्धजनों को रू0 500/- माह की दर से चार त्रैमासिक किश्तों में पेशन की धनराशि प्रदान किये जाने की व्यवस्था की गयी है। पेंशन हेतु पात्र आवेदकों द्वारा पोर्टल http://sspy-up.gov.in/ के माध्यम से आन लाइन आवेदन किया जाता है। आवेदन से लेकर भुगतान तक की समस्त प्रक्रिया पूर्णतया आन लाइन है।

वित्तीय वर्ष 2020-21 हेतु निर्धारित भौतिक लक्ष्य 4345014
वित्तीय वर्ष 2020-21 हेतु बजट प्राविधान   रू0 3694.44 करोड़
शासन द्वारा अवमुक्त धनराशि  रू0 3694.44 करोड़
वित्तीय वर्ष 2020-21 में व्यय की गई धनराशि रू0 3694.44 करोड़
निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष भौतिक उपलब्धि 5121454
वित्तीय वर्ष 2021-22 हेतु कुल बजट प्राविधान रू0 3595.00 करोड़
राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना

इस योजनान्तर्गत गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार के कमाऊ मुखिया, जिसकी आयु 18 वर्ष से अधिक एवं 60 वर्ष से कम हो, की मृत्यु की दशा मृतक के आश्रित को रू0 30,000/- की एक मुश्त सहायता दिये जाने का प्राविधान है। योजनान्तर्गत धनराशि की अनुपलब्धता होने की दशा में शासनादेश संख्या 1739/26-2-2006 दिनांक 20 जून, 2006 में जनपद स्तर पर जिलाधिकारी को कोषागार नियत-27 (टी0आर0-27) धनराशि आहरण कर योजना का तत्काल लाभ सुनिश्चित कराये जाने के निर्देश है। वित्तीय वर्ष 2015-16 में दिनांक 01 जनवरी, 2016 से यह योजना कम्प्यूटरीकृत करते हुए आनलाइन कर दी गयी है। आवेदक द्वारा वेवपोर्टल http://nfbs.upsdc.gov.in के माध्यम से आनलाइन आवेदन किया जा सकता है।

वित्तीय वर्ष 2020-21 हेतु बजट प्राविधान   रू0 460.00 करोड़
शासन द्वारा अवमुक्त धनराशि  रू0 460.00 करोड़
वित्तीय वर्ष 2020-21 में व्यय की गई धनराशि रू0 450.69 करोड़
निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष भौतिक उपलब्धि 150229
वित्तीय वर्ष 2021-22 हेतु कुल बजट प्राविधान रू0 500.00 करोड़

पूर्वदशम छात्रवृत्ति योजनान्तर्गत अनुसूचित जाति/सामान्य वर्ग (कक्षा 9 व 10) की छात्रवृत्ति हेतु पात्रता के लिए अभिभावक की आय-सीमा रू0 2,50,000/- (रूपये दो लाख पचास हजार) वार्षिक प्रति परिवार निर्धारित की गयी है।

दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजनान्तर्गत अनुसूचित जाति के छात्रों की छात्रवृत्ति हेतु अभिभावक की आय-सीमा रू0 2,50,000/- (रूपये दो लाख पचास हजार) वार्षिक प्रति परिवार तथा सामान्य वर्ग के छात्रों की छात्रवृत्ति हेतु अभिभावक की आय-सीमा रू0 2,00,000/- (रूपये दो लाख) वार्षिक प्रति परिवार निर्धारित की गयी है।

छात्र/छात्राओं द्वारा http://scholarship.up.gov.in वेबपोर्टल में माध्यम से छात्रवृत्ति हेतु आवेदन से लेकर भुगतान की समस्त प्रक्रिया आन लाइन है। छात्रवृत्ति की धनराशि पी0एफ0एम0एस0 के माध्यम से छात्रों के बैंक खातों में अन्तरित की जाती है।

समस्त प्रकार की छात्रवृत्ति पूर्वदशम (कक्षा 9-10) एवं दशमोत्तर

 

पूर्वदशम छात्रवृत्ति (अनुसूचित जाति):-
शासन द्वारा अवमुक्त धनराशि रू0 126.31 करोड
वित्तीय वर्ष 2018-19 में व्यय की गई धनराशि रू0 126.31 करोड़
लाभान्वित छात्रों की संख्या रू0 464288 करोड़
वित्तीय वर्ष 2019-20 हेतु कुल बजट प्राविधान रू0 205.00 करोड़
पूर्वदशम छात्रवृत्ति (सामान्य वर्ग):-
शासन द्वारा अवमुक्त धनराशि रू0 16.64 करोड
वित्तीय वर्ष 2018-19 में व्यय की गई धनराशि रू0 16.64 करोड़
लाभान्वित छात्रों की संख्या 62326
वित्तीय वर्ष 2019-20 हेतु कुल बजट प्राविधान रू0 25.00 करोड़
दशमोत्तर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति (अनुसूचित जाति):-
वित्तीय वर्ष 2018-19 हेतु बजट प्राविधान रू0 1811.30 करोड़
शासन द्वारा अवमुक्त धनराशि रू0 1811.30 करोड़  
वित्तीय वर्ष 2018-19 की देयता हेतु व्यय की गई धनराशि रू0 1379.18 करोड़  
वित्तीय वर्ष 2018-19 की देयता के सापेक्ष लाभार्थियों की संख्या 1078258
वित्तीय वर्ष 2018-19 में विगत वर्षो की देयता हेतु व्यय की गई धनराशि रू0 432.12 करोड़  
विगत वर्षो की देयता के सापेक्ष लाभार्थियों की संख्या 142834
वित्तीय वर्ष 2019-20 हेतु कुल बजट प्राविधान रू0 1830.00 करोड़  
दशमोत्तर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति (सामान्य वर्ग):-
वित्तीय वर्ष 2018-19 हेतु बजट प्राविधान रू0 750.00 करोड़
शासन द्वारा अवमुक्त धनराशि रू0 750.00 करोड़
वित्तीय वर्ष 2018-19 में व्यय की गई धनराशि रू0 749.96 करोड़
लाभान्वित छात्रों की संख्या 600069
वित्तीय वर्ष 2019-20 हेतु कुल बजट प्राविधान रू0 825.00 करोड़

 

राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालयों का संचालन
  • प्रदेश में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति/विमुक्त जाति के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र के निर्धन एवं प्रतिभावान छात्रों को उत्कृष्ठ आवासीय शिक्षा निःशुल्क प्रदान करने के उद्देश्य से समाज कल्याण विभाग द्वारा प्रदेश में 94 राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है। शिक्षा के साथ-साथ निःशुल्क छात्रावास, पाठ्य पुस्तकें,यूनीफार्म एवं खेल कूद आदि की व्यवस्था राज्य सरकार करती है। इन विद्यालयों में 60 प्रतिशत अनुसूचित जाति/जनजाति, 25 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्गतथा 15 प्रतिशत सामान्य वर्ग के छात्रों को प्रवेश दिये जाने की व्यवस्था है।
  • उक्त 94 राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालयों में से 45 सी.बी.एस.ई. बोर्ड से एवं अवशेष 49 माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश इलाहाबाद से सम्बद्ध है। 93 राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालयों में स्मार्ट क्लास की व्यवस्था है। बालक- बालिकाओ हेतु पृथक-पृथक राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय संचालित है।
  • 20 जनपदों में राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय के निर्माण की कार्यवाही प्रचलित है।
वित्तीय वर्ष 2020-21 हेतु बजट प्राविधान रू0 192.12 करोड़
शासन द्वारा अवमुक्त धनराशि रू0 192.12 करोड़
वित्तीय वर्ष 2020-21 में व्यय की गई धनराशि रू0 140.14 करोड़
निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष भौतिक उपलब्धि 33338
वित्तीय वर्ष 2021-22 हेतु कुल बजट प्राविधान रू0 250.76 करोड़
  • उत्तर प्रदेश माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण नियमावली, 2014 प्रख्यापित कर, नियमावली में दिये गये प्राविधानों के अनुसार प्रदेश के समस्त 75 जनपदों में वृद्धाश्रमों का संचालन किया जा रहा है। प्रदेश के प्रत्येक जनपद में संचालित वृद्धाश्रम की क्षमता 150 वृद्ध संवासियों की है। स्वैच्छिक संस्थाओं के माध्यम से पी0पी0पी0 माडल पर संचालित वृद्धाश्रम में प्रति वृद्ध संवासी हेतु निःशुल्क आवास, भोजन, वस्त्र, औषधि, मनोरंजन, पर्सनल केयर की सामग्री की पूर्ण सुविधा प्रदान की जा रही है। इन वृद्धाश्रमों में वृद्धजनों हेतु शुद्ध पेय जल (आर0ओ0) की व्यवस्था है।
  • ऐसे वृद्धजन, जो रेलवे स्टेशनो, बस स्टेशनो आदि से जिलाधिकारी, उप जिलाधिकारी, पुलिस अथवा जिला समाज कल्याण अधिकारी के सम्पर्क में आते हैं, जिनके पास रहने, खाने की व्यवस्था नहीं है तथा माननीय संसद, माननीय विधायकगण अथवा अन्य किसी गणमान्य जनप्रतिनिधि द्वारा जरूरतमंद वृद्ध के प्रवेश के सम्बन्ध में संस्तुति की जाती है, तो ऐसे प्रकरणों में जिलाधिकारी की सहमति से जिला समाज कल्याण अधिकारी द्वारा वृद्धाश्रम मे रखे जाने की अनुमति दी जायेगी।
  • वृद्धजनों के भरण-पोषण सम्बन्धी प्रार्थना पत्रों पर सुनवाई के दौरान गठित अधिकरण के संज्ञान में यदि आता है कि भरण-पोषण करने वाले वृद्धजनों के वारिस उन्हें अपने साथ रखना नहीं चाहते हैं तो ऐसे वृद्धजनों की सुनवाई के दौरान उनके अपने खर्च पर वृद्धाश्रम में रखने की अनुमति दी जायेगी।
  • विभिन्न स्तरों पर आश्रमों में प्रवेश हेतु वृद्धजनों के प्राप्त प्रार्थना पत्रों का परीक्षण करके प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण करने हेतु निम्नलिखित समिति गठन की गई है, जिसका विवरण निम्नवत् है:-
    • जिला समाज कल्याण अधिकारी/भरण-पोषण अधिकारी - अध्यक्ष
    • मुख्य विकास अधिकारी द्वारा नामित खण्ड विकास अधिकारी - सदस्य
    • नगर निकाय का प्रतिनिधि - सदस्य
    • संस्था का प्रबन्धक - सदस्य - सचिव
    • वृद्धाश्रम का अधीक्षक - सदस्य
उत्तर प्रदेश माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण एवं वृद्धाश्रमों का संचालन

 

वित्तीय वर्ष 2020-21 हेतु बजट प्राविधान रू0 46.80 करोड़
शासन द्वारा अवमुक्त धनराशि रू0 46.80 करोड़
वित्तीय वर्ष 2020-21 में व्यय की गई धनराशि रू0 46.30 करोड़
वित्तीय वर्ष 2020-21 में कुल लाभान्वितों की संख्या 5246
वित्तीय वर्ष 2021-22 हेतु कुल बजट प्राविधान रू0 50.00 करोड़

अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के व्यक्तियों के विरूद्ध विभिन्न कारणों से अत्याचार व अपराध की घटनाओं की रोकथाम के लिए भारतीय दण्ड संहिता के साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम-1989 का प्राविधान किया गया है। उत्पीड़ित व्यक्तियों अथवा परिवारों को निर्धारित समय सीमा के अन्तर्गत आर्थिक मदद प्रदान की जाती है।

अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 तथा पी0सी0आर0 एक्ट के अन्तर्गत अत्याचार से प्रभावित अनुसूचित जाति के व्यक्तियों या परिवारों को आर्थिक सहायता भारत सरकार की नियमावली के अन्तर्गत न्यूनतम रू0 85,000/-(रूपये पचासी हजार) से लेकर अधिकतम रू0 8,25,000/-(आठ लाख पच्चीस हजार) तक की सहायता विभिन्न प्रकार की घटना की प्रकृति/धारा के आधार पर उपलब्ध करायी जाती है।

 

वित्तीय वर्ष 2020-21 हेतु बजट प्राविधान रू0 250.00 करोड़
शासन द्वारा अवमुक्त धनराशि रू0 250.00 करोड़
वित्तीय वर्ष 2020-21 में व्यय की गई धनराशि रू0 228.31 करोड़
निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष भौतिक उपलब्धि 23592
वित्तीय वर्ष 2021-22 हेतु कुल बजट प्राविधान रू0 275.00 करोड़
  • अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थियों को राज्य सेवाओं की परीक्षा में प्रशिक्षण योजना :-
    • अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़ी जाति के ऐसे अभ्यर्थी जो स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण हो एवं जिनके माता-पिता/अभिभावक की वार्षिक आय सीमा रू0 6.00 लाख से कम हो, को योजनान्तर्गत आच्छादित किया जाता है।
    • समाज कल्याण विभाग द्वारा वर्तमान में सात पूर्व परीक्षा प्रशिक्षण केन्द्र संचालित किये जा रहे है, जिनका विवरण निम्नवत् है:-
  • श्री छत्रपति शाहू जी महाराज शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान, भागीदारी भवन, गोमतीनगर, लखनऊ:-
    यह केन्द्र वर्ष 1997 से संचालित है। इसकी क्षमता 300 प्रशिक्षार्थियों की है, जिसमें 50 प्रतिशत पिछड़ी जाति, 45 प्रतिशत अनुसूचित जाति एवं 5 प्रतिशत जनजाति के अभ्यर्थी होते है।
  • आदर्श पूर्व परीक्षा केन्द्र (बालिका), अलीगंज, लखनऊ:-
    यह केन्द्र वर्ष 1994 से स्थापित है। इसकी क्षमता 150 प्रशिक्षार्थियों की है, जिसमें 50 प्रतिशत पिछड़ी जाति, 45 प्रतिशत अनुसूचित जाति एवं 5 प्रतिशत जनजाति के अभ्यर्थी होते है।
  • न्यायिक सेवा प्रशिक्षण केन्द्र, इलाहाबाद:-
    यह केन्द्र वर्ष 1979 से स्थापित है। इस केन्द्र की क्षमता 50 अभ्यर्थियों की है, जो केवल अनुसूचित जाति के छात्रों हेतु संचालित है।
  • संत रविदास आई0ए0एस0, पी0सी0एस0 पूर्व परीक्षा प्रशिक्षण केन्द्र, वाराणसी:-
    इस केन्द्र का संचालन अगस्त 2008 से प्रारम्भ हुआ है। इसकी क्षमता 100 अभ्यर्थियों की है तथा यह केन्द्र अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थियों के लिए संचालित है।
  • डा0 बी0आर0 अम्बेडकर आई0ए0एस0, पी0सी0एस0 पूर्व परीक्षा प्रशिक्षण केन्द्र, अलीगढ़:-
    अनुसूचित जाति के प्रशिक्षार्थियों हेतु केन्द्र का संचालन 15 दिसम्बर, 2009 से प्रारम्भ किया गया हैं, इस केन्द्र की क्षमता 200 अभ्यर्थियों की है।
  • डा0 बी0आर0 अम्बेडकर आई0ए0एस0, पी0सी0एस0 पूर्व परीक्षा प्रशिक्षण केन्द्र, आगरा:-
    अनुसूचित जाति के अभ्यर्थियों हेतु संचालित इस केन्द्र का संचालन 25 जनवरी, 2010 से प्रारम्भ हुआ है। इसकी क्षमता 200 अभ्यर्थियों की है।
  • आई0ए0एस0, पी0सी0एस0 कोचिंग केन्द्र, निजामपुर, हापुड़:-
    इस केन्द्र का संचालन वर्ष 2010-11 से प्रारम्भ किया गया है। यह केन्द्र अनुसूचित जाति के प्रशिक्षार्थियों के लिए है। केन्द्र में 200 अभ्यर्थियों के प्रशिक्षण की व्यवस्था है, जिसमें 120 पुरूष तथा 80 महिला अभ्यर्थी है।
परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केन्द्रों का संचालन

 

वित्तीय वर्ष 2020-21 हेतु बजट प्राविधान रू0 9.37 करोड़
शासन द्वारा अवमुक्त धनराशि रू0 9.37 करोड़
वित्तीय वर्ष 2020-21 में व्यय की गई धनराशि रू0 7.43 करोड़
लाभान्वित छात्रों की संख्या 852
वित्तीय वर्ष 2021-22 हेतु कुल बजट प्राविधान रू0 7.47 करोड़

 

छात्रावासों का संचालन

अपने घर से दूर रहकर अध्ययन करने वाले अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं के आवासीय समस्या के निदान हेतु समाज कल्याण विभाग द्वारा छात्रावासों का निर्माण कराया जाता है। इन छात्रावासों में छात्रों को निःशुल्क आवासी व्यवस्था, फर्नीचर, विद्युत की सुविधा उपलब्ध करायी जाती है। भोजन बनाने के लिए रसोईयाँ, कहार तथा सफाई के लिए स्वच्छकार की व्यवस्था शासकीय व्यय पर की जाती है, परन्तु भोजन आदि पर आने वाला व्यय छात्रों को स्वयं वहन करना होता है।

समाज कल्याण विभाग द्वारा कुल 262 छात्रावास निर्मित कराये गये हैं, जिनमें अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के छात्रों को आवासीय सुविधा प्रदान करायी जा रही है। बालक एवं बालिकाओं हेतु पृथक-पृथक छात्रावास संचालित है।

 

वित्तीय वर्ष 2020-21 हेतु बजट प्राविधान रू0 41.30 करोड़
शासन द्वारा अवमुक्त धनराशि रू0 41.30 करोड़
वित्तीय वर्ष 2020-21 में व्यय की गई धनराशि रू0 28.97 करोड़
लाभान्वित छात्रों की संख्या 7442
वित्तीय वर्ष 2021-22 हेतु कुल बजट प्राविधान रू0 41.91 करोड़
  • समाज में सर्वधर्म-समभाव तथा सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने हेतु राज्य सरकार द्वारा अक्टूबर, 2017 से “मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना“ संचालित है, जिसके अन्तर्गत विभिन्न समुदाय एवं धर्मों के रीति-रिवाजों के अनुसार वैवाहिक कार्यक्रम सम्पन्न कराया जाता है। योजना का यह भी उद्देश्य है कि विवाह उत्सव में होने वाले अनावश्यक प्रदर्शन एवं अपव्यय को समाप्त किया जाय।
  • रू0 2,00,000/- वार्षिक आय सीमा के अन्तर्गत आने वाले सभी वर्गों के परिवारों को योजनान्तर्गत आच्छादित किया जाता है।
  • योजनान्तर्गत विधवा, परित्यक्ता, तलाकशुदा महिलाओं के विवाह की भी व्यवस्था है।
  • इस योजना में दाम्पत्य जीवन में खुशहाली एवं गृहस्थी की स्थापना हेतु कन्या के खाते में रू0 35,000/- की धनराशि का अनुदान एवं विवाह संस्कार के लिए आवश्यक सामग्री यथा कपड़े, बिछिया, पायल, बर्तन आदि रू0 10,000/- की धनराशि से क्रय करते हुए प्रदान किया जाता है तथा प्रत्येक जोड़े के विवाह आयोजन पर रू0 6,000/- की धनराशि व्यय किये जाने की व्यवस्था है। इस प्रकार योजनान्तर्गत एक जोड़े के विवाह पर कुल रू0 51,000/- की धनराशि की व्यवस्था है।
  • नगरीय निकाय (नगर पंचायत, नगर पालिका परिषद, नगर निगम), क्षेत्र पंचायत, जिला पंचायत स्तर पर पंजीकरण एवं न्यूनतम 10 जोड़ों के विवाह पर सामूहिक विवाह आयोजन की व्यवस्था की गई है।

 

वित्तीय वर्ष 2020-21 हेतु बजट प्राविधान रू0 125.00 करोड़
शासन द्वारा अवमुक्त धनराशि रू0 125.00 करोड़
वित्तीय वर्ष 2020-21 में व्यय की गई धनराशि रू0 118.69 करोड़
विवाहित जोड़ो की संख्या 22780
वित्तीय वर्ष 2021-22 हेतु कुल बजट प्राविधान रू0 250.00 करोड़

 

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना

 

अनुसूचित जाति/सामान्य वर्ग के गरीबी रेखा के जीवन यापन करने वाले ऐसे परिवार जिनकी वार्षिक आय शहरी क्षेत्र में रू0 56460/- व ग्रामीण क्षेत्र में रू0 46080/- तक होती है एवं वर की आयु 21 वर्ष तथा कन्या की आयु 18 वर्ष हो, को रूपये 20000/- की अनुदान राशि आवेदक के बैंक खाते में सीधे अन्तरित की जाती है। योजनान्तर्गत आवेदन से लेकर भुगतान तक समस्त प्रक्रिया पूर्णतया आन लाइन है।

आवेदक द्वारा विवाह तिथि से 90 दिन पूर्व से 90 दिन पश्चात् तक आवेदन वेबपोर्टल http://shadianudan.upsdc.gov.in पर किये जाने की व्यवस्था है।

 

अनुसूचित जाति शादी अनुदान-
वित्तीय वर्ष 2020-21 हेतु बजट प्राविधान रू0 50.00 करोड़
शासन द्वारा अवमुक्त धनराशि रू0 50.00 करोड़
वित्तीय वर्ष 2020-21 में व्यय की गई धनराशि रू0 47.91 करोड़
लाभान्वित व्यक्तियों की संख्या 23957
वित्तीय वर्ष 2021-22 हेतु कुल बजट प्राविधान रू0 100.00 करोड़
सामान्य वर्ग शादी अनुदान-
वित्तीय वर्ष 2020-21 हेतु बजट प्राविधान रू0 25.00 करोड़
शासन द्वारा अवमुक्त धनराशि रू0 25.00 करोड़
वित्तीय वर्ष 2020-21 में व्यय की गई धनराशि रू0 22.65 करोड़
लाभान्वित व्यक्तियों की संख्या 11324
वित्तीय वर्ष 2021-22 हेतु कुल बजट प्राविधान रू0 50.00 करोड़

ऐसे संगठन जो अनुसूचित जाति के बच्चों की शिक्षा में गहरी रूचि लेते हैं और प्राइमरी पाठशालाओं को संचालित कर शिक्षा देते हैं, उन्हें शासन की वित्तीय स्थिति तथा नीतियों के अनुसार आवर्तक अनुदान दिया जाता है। अनुदान के लिए स्वैच्छिक संगठनों द्वारा संचालित विद्यालयों में इस बात का विशेष ध्यान दिया जाता है कि इसमें अनुसूचित जाति के छात्रों की संख्या 50 प्रतिशत से कम न हो। वर्तमान में इन विद्यालयों की कुल संख्या-584 है। शासनादेश संख्या-2547/26-2-2017 दिनांक 05-10-2006 द्वारा निजी प्रबन्धाधिकरण द्वारा संचालित प्राइमरी स्कूलों को आवर्तक अनुदान दिये जाने की नीति समाप्त कर दी गयी है।

आवर्तक अनुदान प्राप्त प्राइमरी पाठशालाओं में अनुमन्य अध्यापकों के लिए विभाग द्वारा निर्धारित वेतनमान के अनुसार वेतन के समतुल्य धनराशि प्रत्येक वर्ष आवर्तक अनुदान के रूप में प्रदान की जाती है।

निःशुल्क बोरिंग योजना के अन्तर्गत अनुसूचित जाति परिवार के गरीबी की रेखा के नीचे मैदानी क्षेत्र में निवास करने वाले लघु एवं सीमान्त कृषको के खेतों में बोरिंग करायी जाती है।

योजनान्तर्गत प्रति बोरिंग रू0 10,000/- (रूपये दस हजार) की आर्थिक सहायता दी जाती है। बोरिंग का का कार्य शासन द्वारा चयनित एजेन्सी के द्वारा किया जाता है। योजना में लाभ प्राप्त करने हेतु जनपद स्तर पर जिला समाज कल्याण अधिकारी (विकास) एवं विकास खण्ड स्तर पर सहायक/ग्राम विकास अधिकारी(स0क0) से विस्तृत जानकारी प्राप्त किया जा सकता है। आवेदक द्वारा विकास खण्ड स्तर पर तथा जनपद स्तर पर आवेदन किया जा सकता है।

वित्तीय वर्ष 2021-22 हेतु बजट प्राविधान रू0 15.00 करोड़